जल ही जीवन है,/ दुनिया में पानी बचाने के 5 तरीके
जल को बचाइए क्योकि:जल है तो कल है
हामरे देश मे जल कि भारी कमी हो रही है इसे बचने के लिए आप से अनुरोध है
आप को पानी की जीतनी जरूरत हो उतना ही खर्च करे
कही कहीं पानी पीने के लिय नही मिल पा रहा है मै अपने ब्लॉग से ये बात आप तक पहुंचा रही हूं plzz आज से ही इस पर ध्यान दे,
1.हर नागरिक में जल संरक्षण हेतु जागरूकता लानी होगी।
2. हर नागरिक शावर की जगह बाल्टी में पानी भरकर स्नान करें।
3. सेविंग करते समय नल बंद रखें।
4. बर्तन धुलते समय नल के स्थान पर टब का प्रयोग करें।
5. उत्तराखंड जल संसाधन के अनुसार, ‘‘टॉयलेट में लगी फ्लश की टंकी में प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर रख देने से हर बार एक लीटर जल बचाया जा सकता है।
6. गाँव और शहरों में पहले तालाब हुआ करते थे जिनमें जल एकत्र रहता था जो न केवल पानी के स्तर को आस-पास बचाये रखता था बल्कि दैनिक उपयोग के काम आता था। आज गाँवों और शहरों के तालाबों को पाट कर घर बना लिये गए हैं। अतः जरूरी है कि जल संरक्षण हेतु गाँव और शहरों में तालाब फिर से खोदे जाएँ।
7. गंदे जल का सिंचाई में उपयोग करके भी जल संरक्षण किया जा सकता है।
8. वर्षा का जल छत पर संरक्षण कर उसका उपयोग करना। इसलिये छत पर पानी टंकी बनाना होगा।
9. सार्वजनिक स्थल के नल की टोटी अक्सर खराब रहती है उसकी मरम्मत कर तथा लोगों में जागरूकता लाकर हजारों लीटर पानी संरक्षित किया जा सकता है।
10. पर्यावरण के प्रति जागरूकता जरूरी है क्योंकि पर्यावरण संतुलन का सकारात्मक प्रभाव जल संरक्षण पर पड़ता है। कटते वृक्षों के कारण भूमि की नमी लगातार कम हो रही है जिससे भूजल स्तर पर बुरा असर पड़ रहा है। अतः जरूरी है कि वृक्षारोपण कार्यक्रम हेतु जागरूकता लाई जाए।
. देश की बड़ी आबादीभयंकर जल संकट से जूझ रही है। इस बार की गर्मियों के दृश्य और आंकड़े डराने वाले है। गांव-देहातोंकी स्थिति और भी बदतर होती जा रहीहै।600 से 800 फीट जमीन के नीचे भी पानी नहीं मिल रहा और लोग मीलों दूर से पानी ढोकर लाने या प्रदूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। प्रदूषण औरजलवायु परिवर्तन के कारणदुनियाभर के देश जलसंकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन सिंगापुर से लेकर जापान तक लोगअनोखे तरीके अपना।कर इस संकट का समाधान भी कर रहे हैं। ऐसे ही 5 इनोवेटिव तरीके जिन्हेंभारत में भी अपनाकरसंकट को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
तौर-तरीके जो जलसंकट दूर करने के गवाह बने
जापान: नहाने के लिए एक ही पानी का पुन:प्रयोग
यहां एक ही पानी का इस्तेमाल कई बार किया जाता है। नहाने के लिए वॉटर स्प्रे और बाथटब का प्रयोग करते हैं। पहले वाटर स्प्रे शरीर को भिगोते हैं, फिर बाथटब में वाटर डिसइंफेक्टेंट डालकर इसमें बैठते हैं। इस बाथटब वाटर का इस्तेमाल परिवार के कई सदस्य बारी-बारी करते हैं। बाद में इस पानी का इस्तेमाल घर और कपड़े की सफाई में किया जाता है। वॉशिंग मशीन और घर की धुलाई में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा भी जापान के ज्यादातर घरों में बेसिन के पानी का इस्तेमाल टॉयलेट की सफाई के लिए होता है। नल से हाथ धोने के बाद पानी बेसिन के नीचे स्टोर बॉक्स में इकट्ठा होकर टॉयलेट के फ्लशटैंक में जाता है। यहां से इसका इस्तेमाल किया जाता है।
चीन: फिश बेसिन से पानी की बचत का अनोखा फॉर्मूला
चीन के डिजाइनर यान लू ने एक दशक से पहले लिटिल फिश बेसिन बनाया। यह अपनी बनावट के कारण चीन में काफी लोकप्रिय हुआ और घरों में इस्तेमाल भी किया गया। इसमें बेसिन के ऊपर फिश जार बनाकर इसमें मछली छोड़ी गई। हाथ धोने के दौरान फिश जार का पानी कम होने लगता है जो पानी को कम से कम इस्तेमाल करने की याद दिलाता है। हाथ धोने के बाद वापस जार में पानी भर जाता है। सिंक से निकले पानी का इस्तेमाल सफाई जैसे कामों के लिए किया जा सकता है।
सिंगापुर : 4 लीटर पानी से स्नान और स्प्रे से धुलाई
सिंगापुर में पानी बचाने के लिए अनोखा तरीका निकाला गया है। इसके मुताबिक, एक इंसान नहाने के लिए 4 लीटर पानी का इस्तेमाल करेगा और फर्श धोने के लिए स्प्रे का प्रयोग करेगा। बाथरूम में मॉडिफाई शॉवर लगवाए जा रहे हैं जिसमें वाटर प्रेशर ऐसा है कि एक इंसान 5 मिनट के अंदर मात्र 4 लीटर पानी से नहा सकता है। वर्तमान में सिंगापुर पानी के लिए मलेशिया पर आश्रित है। अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2040 तक सिंगापुर पानी की भयंकर किल्लत से जूझेगा। इसे ध्यान में रखते हुए दैनिक जीवन में पानी का इस्तेमाल 8% तक कम करने की मुहिम चलाई जा रही है।
अफ्रीका: लीकेज दुरुस्त कर 30 फीसदी पानी बचाया
दक्षिण अफ्रीका के मशहूर केपटाउन शहर में समुद्र से घिरे होने के बावजूद डे-जीरो वाली स्थितियां बन गई हैं। यहां पानी लगभग खत्म होने लगा तो लोगों और सरकार ने मिलकर सबसे पहले उन जगहों को ढूंढ़ा जहां पानी व्यर्थ बहता है। तमाम उपायों के बीच लोगों से पानी का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की गई। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को पानी बचाने की ट्रेनिंग दी गई। केपटाउन की 20,574 जगहों पर लीकेज के कारण हो रही पानी की बर्बादी को रोका गया। पुरानी पाइपलाइन को बदला गया। गोल्फ कोर्स और पार्कों में सिर्फ ट्रीटेट पानी का इस्तेमाल हुआ। नतीजा ये रहा कि जनसंख्या में बढ़ोतरी के बाद भी पानी की बर्बादी 30 फीसदी तक कम हुई है, डे-जीरो से कुछ राहत मिली है।me
यूरोप : एसी और आरओ वाटर से कपड़ों की धुलाई
एसी और आरओ से निकले पानी का इस्तेमाल इंग्लैंड, डेनमार्क समेत यूरोप के कई देशों में बागवानी और कपड़ों की धुलाई के लिए किया जा रहा है। यहां से निकलने वाले पानी को पाइप के जरिए स्टोरेज टैंक तक पहुंचाया जा रहा है जहां से इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है- एक आरओ मशीन से औसत 20 लीटर पानी शुद्ध पेयजल प्राप्त होता है। इसे तैयार करने में 50 लीटर पानी बेकार बाहर निकलता है। औसत निकालें तो लगभग दो लाख लीटर पानी इन मशीनों से खराब बताकर बाहर फेंका जाता है। जिसे बचाकर जलसंकट से बचा जा सकता है।
‘रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून
पानी गए न उबरे, मोती, मानुस, चून’।
जल को बचाइए क्योकि:जल है तो कल है
हामरे देश मे जल कि भारी कमी हो रही है इसे बचने के लिए आप से अनुरोध है
आप को पानी की जीतनी जरूरत हो उतना ही खर्च करे
कही कहीं पानी पीने के लिय नही मिल पा रहा है मै अपने ब्लॉग से ये बात आप तक पहुंचा रही हूं plzz आज से ही इस पर ध्यान दे,
1.हर नागरिक में जल संरक्षण हेतु जागरूकता लानी होगी।
2. हर नागरिक शावर की जगह बाल्टी में पानी भरकर स्नान करें।
3. सेविंग करते समय नल बंद रखें।
4. बर्तन धुलते समय नल के स्थान पर टब का प्रयोग करें।
5. उत्तराखंड जल संसाधन के अनुसार, ‘‘टॉयलेट में लगी फ्लश की टंकी में प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर रख देने से हर बार एक लीटर जल बचाया जा सकता है।
6. गाँव और शहरों में पहले तालाब हुआ करते थे जिनमें जल एकत्र रहता था जो न केवल पानी के स्तर को आस-पास बचाये रखता था बल्कि दैनिक उपयोग के काम आता था। आज गाँवों और शहरों के तालाबों को पाट कर घर बना लिये गए हैं। अतः जरूरी है कि जल संरक्षण हेतु गाँव और शहरों में तालाब फिर से खोदे जाएँ।
7. गंदे जल का सिंचाई में उपयोग करके भी जल संरक्षण किया जा सकता है।
8. वर्षा का जल छत पर संरक्षण कर उसका उपयोग करना। इसलिये छत पर पानी टंकी बनाना होगा।
9. सार्वजनिक स्थल के नल की टोटी अक्सर खराब रहती है उसकी मरम्मत कर तथा लोगों में जागरूकता लाकर हजारों लीटर पानी संरक्षित किया जा सकता है।
10. पर्यावरण के प्रति जागरूकता जरूरी है क्योंकि पर्यावरण संतुलन का सकारात्मक प्रभाव जल संरक्षण पर पड़ता है। कटते वृक्षों के कारण भूमि की नमी लगातार कम हो रही है जिससे भूजल स्तर पर बुरा असर पड़ रहा है। अतः जरूरी है कि वृक्षारोपण कार्यक्रम हेतु जागरूकता लाई जाए।
. देश की बड़ी आबादीभयंकर जल संकट से जूझ रही है। इस बार की गर्मियों के दृश्य और आंकड़े डराने वाले है। गांव-देहातोंकी स्थिति और भी बदतर होती जा रहीहै।600 से 800 फीट जमीन के नीचे भी पानी नहीं मिल रहा और लोग मीलों दूर से पानी ढोकर लाने या प्रदूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। प्रदूषण औरजलवायु परिवर्तन के कारणदुनियाभर के देश जलसंकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन सिंगापुर से लेकर जापान तक लोगअनोखे तरीके अपना।कर इस संकट का समाधान भी कर रहे हैं। ऐसे ही 5 इनोवेटिव तरीके जिन्हेंभारत में भी अपनाकरसंकट को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
तौर-तरीके जो जलसंकट दूर करने के गवाह बने
जापान: नहाने के लिए एक ही पानी का पुन:प्रयोग
यहां एक ही पानी का इस्तेमाल कई बार किया जाता है। नहाने के लिए वॉटर स्प्रे और बाथटब का प्रयोग करते हैं। पहले वाटर स्प्रे शरीर को भिगोते हैं, फिर बाथटब में वाटर डिसइंफेक्टेंट डालकर इसमें बैठते हैं। इस बाथटब वाटर का इस्तेमाल परिवार के कई सदस्य बारी-बारी करते हैं। बाद में इस पानी का इस्तेमाल घर और कपड़े की सफाई में किया जाता है। वॉशिंग मशीन और घर की धुलाई में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा भी जापान के ज्यादातर घरों में बेसिन के पानी का इस्तेमाल टॉयलेट की सफाई के लिए होता है। नल से हाथ धोने के बाद पानी बेसिन के नीचे स्टोर बॉक्स में इकट्ठा होकर टॉयलेट के फ्लशटैंक में जाता है। यहां से इसका इस्तेमाल किया जाता है।
चीन: फिश बेसिन से पानी की बचत का अनोखा फॉर्मूला
चीन के डिजाइनर यान लू ने एक दशक से पहले लिटिल फिश बेसिन बनाया। यह अपनी बनावट के कारण चीन में काफी लोकप्रिय हुआ और घरों में इस्तेमाल भी किया गया। इसमें बेसिन के ऊपर फिश जार बनाकर इसमें मछली छोड़ी गई। हाथ धोने के दौरान फिश जार का पानी कम होने लगता है जो पानी को कम से कम इस्तेमाल करने की याद दिलाता है। हाथ धोने के बाद वापस जार में पानी भर जाता है। सिंक से निकले पानी का इस्तेमाल सफाई जैसे कामों के लिए किया जा सकता है।
सिंगापुर : 4 लीटर पानी से स्नान और स्प्रे से धुलाई
सिंगापुर में पानी बचाने के लिए अनोखा तरीका निकाला गया है। इसके मुताबिक, एक इंसान नहाने के लिए 4 लीटर पानी का इस्तेमाल करेगा और फर्श धोने के लिए स्प्रे का प्रयोग करेगा। बाथरूम में मॉडिफाई शॉवर लगवाए जा रहे हैं जिसमें वाटर प्रेशर ऐसा है कि एक इंसान 5 मिनट के अंदर मात्र 4 लीटर पानी से नहा सकता है। वर्तमान में सिंगापुर पानी के लिए मलेशिया पर आश्रित है। अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2040 तक सिंगापुर पानी की भयंकर किल्लत से जूझेगा। इसे ध्यान में रखते हुए दैनिक जीवन में पानी का इस्तेमाल 8% तक कम करने की मुहिम चलाई जा रही है।
अफ्रीका: लीकेज दुरुस्त कर 30 फीसदी पानी बचाया
दक्षिण अफ्रीका के मशहूर केपटाउन शहर में समुद्र से घिरे होने के बावजूद डे-जीरो वाली स्थितियां बन गई हैं। यहां पानी लगभग खत्म होने लगा तो लोगों और सरकार ने मिलकर सबसे पहले उन जगहों को ढूंढ़ा जहां पानी व्यर्थ बहता है। तमाम उपायों के बीच लोगों से पानी का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की गई। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को पानी बचाने की ट्रेनिंग दी गई। केपटाउन की 20,574 जगहों पर लीकेज के कारण हो रही पानी की बर्बादी को रोका गया। पुरानी पाइपलाइन को बदला गया। गोल्फ कोर्स और पार्कों में सिर्फ ट्रीटेट पानी का इस्तेमाल हुआ। नतीजा ये रहा कि जनसंख्या में बढ़ोतरी के बाद भी पानी की बर्बादी 30 फीसदी तक कम हुई है, डे-जीरो से कुछ राहत मिली है।me
यूरोप : एसी और आरओ वाटर से कपड़ों की धुलाई
एसी और आरओ से निकले पानी का इस्तेमाल इंग्लैंड, डेनमार्क समेत यूरोप के कई देशों में बागवानी और कपड़ों की धुलाई के लिए किया जा रहा है। यहां से निकलने वाले पानी को पाइप के जरिए स्टोरेज टैंक तक पहुंचाया जा रहा है जहां से इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है- एक आरओ मशीन से औसत 20 लीटर पानी शुद्ध पेयजल प्राप्त होता है। इसे तैयार करने में 50 लीटर पानी बेकार बाहर निकलता है। औसत निकालें तो लगभग दो लाख लीटर पानी इन मशीनों से खराब बताकर बाहर फेंका जाता है। जिसे बचाकर जलसंकट से बचा जा सकता है।
‘रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून
पानी गए न उबरे, मोती, मानुस, चून’।




No comments:
Post a Comment