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Tuesday, 28 May 2019

गर्मी से राहत दिलाएं, दही, छाछ और लस्सी



Helth tips in hindi

गर्मी से राहत दिलाएं, दही, छाछ और लस्सी


गर्मी का मौसम आते ही कूलिंग इफेक्ट वाले फूड और ड्रिंक्स का दौर बढ़ जाता है, जिनमें से कुछ तो सदियों से प्रचलित देसी रिफ्रेशिंग ड्रिंक्स की श्रेणी में आते हैं। दही, दही से बनी मीठी लस्सी और काला नमक, भुना जीरा, काली मिर्च व पुदीना पाउडर मिली नमकीन छाछ भी इनमें शामिल हैं। इनके फायदों के बारे में जानकारी दे रही हूँ। मैं आप को

दही का सेवन अकसर नाश्ते या दोपहर के खाने के साथ किया जाता है, लेकिन चिलचिलाती धूप से बचने के लिए दिन में किसी भी समय लस्सी-छाछ पीने का चलन बढ़ गया है। ठंडी तासीर की ये चीजें जहां गर्मी से राहत पहुंचाने के लिए अमृत के समान मानी जाती हैं, वहीं ये पौष्टिक तत्वों, एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल और एंटी ऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण हमारी सेहत के लिए भी फायदेमंद होती हैं।

गर्मी संबंधी समस्याएं होती हैं दूर



नियमित रूप से ठंडी तासीर वाली लस्सी या छाछ का सेवन हीट स्ट्रोक से बचाने और चिलचिलाती गर्मी, घमौरियां, जलन, खुजली जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाए रख कर डीहाइड्रेशन से बचाता है। ठंडी-ठंडी लस्सी गर्मी की वजह से होने वाली घबराहट, थकान को दूर कर ऊर्जा प्रदान करती है।

सुधरती है रोग प्रतिरोधक क्षमता



दही में मौजूद लैक्टिक एसिड, प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन डी और अन्य पौष्टिक तत्व शरीर में मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

पाचन एजेंट

प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत होने के कारण दही आंतों में हेल्दी बैक्टीरिया का विकास करता है, जो पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। अपच, पेट फूलने, कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में दही, लस्सी या छाछ का नियमित सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है।

कब्ज होने पर

कब्ज होने पर छाछ में अजवायन का पाउडर, पेट साफ न होने पर बारीक कटे पुदीना के पत्ते और खाना ठीक से न पचने की स्थिति में छाछ में भुना जीरा, काली मिर्च, काला नमक मिलाकर पीना फायदेमंद साबित होता है। एसिडिटी की समस्या हो, तो छाछ में मिश्री, काली मिर्च, सेंधा नमक मिलाकर पीने से तुरंत काफी आराम मिलता है। छाछ की मात्रा आपकी जरूरत के अनुसार हो सकती है।

वजन करे नियंत्रित

प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम से भरपूर दही कोर्टिसोल के निर्माण को रोकता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। कैलरी की मात्रा कम होने के बावजूद एक गिलास लस्सी का सेवन भूख को शांत करता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देता है।

मांसपेशियों को बढ़ाने में मददगार

प्रोटीन और मलाई युक्त मीठी लस्सी मांसपेशियां गठित करने में मदद करती है। दुबले व्यक्ति या बॉडी बिल्डर्स के लिए लस्सी का नियमित सेवन फायदेमंद साबित होता है।

हड्डियों और दांतों को बनाए मजबूत
कैल्शियम, विटामिन सी और डी का अच्छा स्रोत होने के कारण छाछ का नियमित सेवन हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

छाछ के नुकसान –

छाछ वास्तव में एक हल्का तरल पेय पदार्थ है जो दही को मथ कर बनाया जाता है। छाछ में दूध की अपेक्षा वसा कम होती है क्योंकि मक्खन (butter) बनाने के लिए पहले ही क्रीम निकाल ली जाती है। छाछ के फायदे(chhach ke fayde ) और स्वास्थ्य लाभ अनेक हैं। यह विटामिन और खनिज से समृद्ध होने के साथ ही अच्छे पाचन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेट को ठंडक प्रदान करने के लिए मट्ठा बहुत उपयोगी माना जाता है। छाछ का सेवन करने से गर्मी शांत होती है आइये जानते है छाछ के फायदे और छाछ के नुकसान के बारें में।

मट्ठे में पाये जाने वाले पोषक तत्व – Nutritional value of chaas


मट्ठे में पाये जाने वाले पोषक तत्व –

होल मिल्क की तुलना में छाछ में कैलोरी और वसा दोनों बहुत ही कम पाया जाता है। छाछ में उच्च मात्रा में पोटैशियम, विटामिनB12, कैल्शियम, रोइबोफ्लैविन मौजूद होता है इसके अलावा फॉस्फोरस का भी बढ़िया स्रोत है। छाछ ताजा या फ्रीज करके एवं पावडर के रूप में भी उपल्ब्ध है। (chhach ke fayde in hindi)

छाछ के फायदे – chhach ke fayde

छाछ के फायदे ब्लड प्रेशर घटाने में – 

एक स्टडी में पाया गया है कि बायोएक्टिव प्रोटीन छाछ या मट्ठे में बहुत प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को घटाने का काम करता है और जीवाणरोधी एवं एंटीवायरल प्रकृति का होता है। प्रतिदिन छाछ या मट्ठे का सेवन करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और हृदय संबंधी दिक्कतें नहीं होती हैं।

छाछ का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है –

आयुर्वेद में विकारों को दूर करने के लिए छाछ का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। छाछ कोलेस्ट्रॉल को घटाने में एक प्राकृतिक औषधि का कार्य करता है औऱ सेहत को ठीक रखने के लिए अच्छा माना जाता है। प्रतिदिन छाछ का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है।


छाछ के गुण पेट की जलन दूर करने में – 

अदरक और सादे मसाले को मट्ठे में मिलाकर पीने से जलन (burning sensation) की समस्या दूर हो जाती है क्योंकि छाछ या मट्ठा पेट के एसिड रिफ्लक्स को दूर करता है और एसिडिटी नहीं होने देता है। यह पेट की लाइनिंग को भी राहत प्रदान करता है और मसालेदार एवं ऑयली भोजन खाने पर पेट को गड़बड़ होने से बचाता है।

छाछ के फायदे कब्ज दूर करने में –

पेट फूलने से बचाने में बटरमिल्क या मट्ठा एक प्राकृतिक थेरेपी का कार्य करता है। यह पेट में कब्ज नहीं बनने देता है और खराब भोजन करने के बाद भी पाचन क्रिया पर दबाव पड़ने से डायरिया के खतरे से बचाने में मदद करता है। कब्ज की परेशानी से जूझ रहे लोगों को प्रतिदिन एक गिलास मट्ठे का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो कब्ज जल्दी दूर कर देता है।

छाछ के फायदे वजन घटाने में – 

इसमें फैट और कैलोरी नहीं पाया जाता है और पोषक तत्वों (nutrients) एवं एंजाइम से भरपूर होने के कारण छाछ का सेवन करने से वजन घटाने में सहायता मिलती है। रोज मट्ठा पीने से यह शरीर में पानी की भी पूर्ति करता है और ऊर्जा प्रदान करता है। इसमें कैल्शियम के साथ ही पोटैशियम, प्रोटीन और विटामिन सहित कई खनिज पाये जाते हैं तो एनर्जी लेवल को बनाए रखने में मदद करते हैं और भूख को नियंत्रित रखते हैं।

अल्सर के इलाज में मट्ठा उपयोगी –

यह पेट की लाइनिंग में जमा होने वाले एसिड को बेअसर करता है और पेट के अल्सर से सुरक्षा प्रदान करता है। यह ठंडे प्रकृति का होता है जो पेट को शीतल रखता है और पेट में अम्ल को फैलने से बचाने में मदद करता है। मट्ठा एक ऐसा पेय पदार्थ है जो अल्सर जैसी बीमारी में एक थेरेपी का कार्य करता है छाछ का सेवन करने से पेट के सभी बिकार दूर हो जाते है।

हीमोरॉयड के इलाज में छाछ गुणकारी –

कई तरह के विकारों को दूर करने में छाछ का उपयोग तो किया ही जाता है साथ में हीमोरॉयड (Haemorrhoids) के इलाज में भी यह पेय पदार्थ काफी सहायक होता है। एक कप छाछ में चावल और केला मिलाकर खाने से हीमोरॉयड के रोगियों को इस बीमारी में राहत मिलती है।

बटर मिल्क के फायदे ऑस्टियोपोरोसिस में –

कैल्शियम से भरपूर (calcium rich mattha) होने के कारण मट्ठा का सेवन करने से ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी में राहत मिलती है। हमें प्रतिदिन एक हजार मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है, और एक कप मट्ठे का सेवन करने से 284 मिलीग्राम कैल्शियम हमें आसानी से प्राप्त हो जाता है। शरीर में पर्याप्त कैल्शियम होने से बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के टूटने और उनमें तकलीफ समस्या नहीं होती है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी से राहत मिलती है।

मट्ठा के फायदे त्वचा के लिए – 

हमारे शरीर में कई तरह के विषाक्त पदार्थ जमा रहते हैं जिन्हें शरीर में बाहर निकालने में छाछ प्रभावी होता है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और त्वचा को नमी प्रदान (moisturise) करता है और चेहरे की देखभाल में सहायता करता है। इसमें प्रोबायोटिक लैक्टिक एसिड होता है जो फेशियल मास्क के रूप में प्रयोग होता है और यह चेहरे पर बढ़ती उम्र के झुर्रियों को कम करता है। छाछ का सेवन करने से त्वचा सालों साल जवान रहती है।

छाछ के नुकसान –

1.chaas ke nuksan बुखार या कमजोरी की स्थिति में मट्ठे का सेवन करना बहुत नुकसानदायक होता है।

2.अधिक मात्रा में छाछ का सेवन करने से डायरिया एवं मिचली की समस्या हो सकती है।

3.सर्दी खांसी में छाछ का उपयोग न करें अन्यथा स्थिति और गंभीर हो सकती है।

4.मट्ठे में सैचुरेटेड फैट होता है और कुछ गंभीर परिस्थितियों में यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है इसलिए हृदय रोगियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

5.अगर आप एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्यांओं से जूझ रहे हों तो मट्ठे के सेवन से दूर रहें।

6.यदि गुर्दे की तकलीफ या बीमारी से ग्रसित हों तो मट्ठे का सेवन न करें अन्यथा स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।


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Ma

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